Zerodha की तकनीकी गड़बड़ी से ट्रेडर को 37,000 रुपये का नुकसान, लेकिन रिफंड में आनाकानी कर रही ब्रोकरेज फर्म

Zerodha की तकनीकी गड़बड़ी से ट्रेडर को 37,000 रुपये का नुकसान, लेकिन रिफंड में आनाकानी कर रही ब्रोकरेज फर्म

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ब्रोकरेज फर्म जेरोधा के प्लेटफॉर्म पर तकनीकी गड़बड़ी की वजह से एक ट्रेडर द्वारा 37,000 रुपये गंवाने की खबर सुर्खियों में है। इस घटना के बाद इस तरह के नुकसान को लेकर ब्रोकरेज फर्मों की जवाबदेही के बारे में चिंताएं बढ़ गई हैं। हाल के महीनों में ट्रेडर्स ने ऐसी कई तकनीकी गड़बड़ियों के बारे में जानकारी दी है। ट्रेडिंग वॉल्यूम में बढ़ोतरी के साथ-साथ ऐसी गड़बड़ियों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

ट्रेडर जयराज पाटिल ने जेरोधा के साथ अपने अनुभव को साझा करते बताया कि किस तरह से कंपनी के एक प्रतिनिधि ने इस मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। उनके मुताबिक, पहले उन्हें इस सिलसिले में 20% का ऑफर दिया गया। इसके बाद इसे बढ़ाकर क्रमशः 30%, 70%, 80%, 90% और आखिरी में पूरा रिफंड तक ले जाया गया। पाटिल ने बताया कि जब उन्होंने इस मामले में कानूनी रास्ता चुना और अपनी समस्या को सोशल मीडिया पर साझा किया, तो एक दूसरे प्रतिनिधि ने यह ऑफर वापस ले लिया।

यह घटना ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स की विश्वसनीयता और जवाबदेही को लेकर निवेशकों की बढ़ती चिंता के बारे में काफी कुछ बताती है। इससे खास तौर पर तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से होने वाले वित्तीय नुकसान के बारे में पता चलता है। पाटिल ने मनीकंट्रोल (Moneycontrol) के साथ कॉल रिकॉर्डिंग भी साझा की है, जिसमें जेरोधा के एंप्लॉयी पाटिल के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर काफी जोर दे रहे हैं। एंप्लॉयी ने पाटिल को यह चेतावनी भी दी कि किसी दूसरे से ट्वीट लिखवाना गैर-कानूनी है और उन्होंने उन लोगों का नाम भी लिया, जिन्होंने यह ट्वीट लिखा था।

पाटिल ने 1 फरवरी को तकरीबन 40 दिनों की मशक्कत के बाद ऑनलाइन विवाद निपटारा (ODR) सिस्टम के तहत बैठक में हिस्सा लिया था। मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने SCORES प्लेटफॉर्म के तहत ODR का गठन किया है। बैठक में जेरोधा के एंप्लॉयी ने बताया कि ब्रोकरेज फर्म ने रिफंड के सभी ऑफर वापस ले लिए हैं।

कस्टमर केयर से क्यों नहीं मिली मदद?

पाटिल ने मनीकंट्रोल को बताया कि शुरू में उन्होंने जेरोधा के कस्टमर केयर से मदद मांगी थी, लेकिन वह इस प्रक्रिया से परेशान हो गए। कस्टमर सर्विस टीम से बातचीत में उन्होंने बिना ब्रोकरेज के 100% रिफंड का ऑफर स्वीकार कर लिया था। हालांकि, कुछ दिनों के बाद एक और एग्जिक्यूटिव का कहना है कि यह ऑफर वैलिड नहीं है। जेरोधा का कहना है कि फर्म रिफंड को प्रोसेस कर रही थी, लेकिन क्लाइंट द्वारा ODR सिस्टम के जरिये आगे बढ़ने के बाद हमने रिफंड से पहले ODR के फैसले का इंतजाम करने का फैसला किया।

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