Smallcaps Tips: स्मॉलकैप शेयरों से कमाना है तगड़ा मुनाफा, तो बिल्कुल न करें ये 7 गलतियां

Smallcaps Tips: स्मॉलकैप शेयरों से कमाना है तगड़ा मुनाफा, तो बिल्कुल न करें ये 7 गलतियां

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7 Mistakes to Avoid while Investing in Smallcaps: स्मॉलकैप शेयर मुनाफा तो तगड़ा कराते हैं, लेकिन इनमें जोखिम भी काफी बड़ा होता है। अगर आप स्मॉलकैप शेयरों में निवेश की सोच रहे हैं, तो आपको कुछ बातों को ध्यान रखना चाहिए। यह इसलिए भी जरूरी है कि क्योंकि 2023 में इन शेयरों ने भारी मुनाफा कराया था। इनफैक्ट, पिछले साल सबसे अधिक पैसा स्मॉलकैप शेयरों ने ही बनाया था। ऐसे में काफी संख्या में नए निवेशक इन शेयरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि अधिक रिटर्न की लालच कई बार अंधा भी कर देती है। यहां हम आपको 7 कॉमन मिस्टेक्स बता रहे हैं, जिन्हें आपको स्मॉलकैप में निवेश करते समय जरूर ध्यान रखना चाहिए।

1. गलत समय में एंट्री और जल्दबाजी में बाहर निकलने से बचें

अगर आप हेराफेरी फिल्म की तरह ऐसे स्टॉक्स का सपना देखते हैं, जो बस 21 दिन में आपका पैसा डबल कर दें, तो आप एक बहुत बड़ी गलती कर रही है। ऐसे सपने देखना आपको भारी घाटा करा सकता है। स्मॉल-कैप में निवेश के लिए मार्केट एक्सपर्ट्स तीन मंत्र बताते हैं। पहला- सही समय पर एंट्री करें। दूसरा- स्टॉक को बढ़ने का पर्याप्त मौका दें। और तीसरा- सीजनल उतारचढ़ाव के लिए अपने रिस्क को मैनेज करें। सही समय पर एंट्री का मतलब है कि जब स्टॉक का भाव ऊंचा हो, उस वक्त उसमें एंट्री नहीं करें, बल्कि इसके सही वैल्यूएशन पर आने का इंतजार करें।

नुवामा प्रोफेशनल क्लाइंट्स ग्रुप के संदीप रैना ने बताया कि स्मॉलकैप शेयरों में जितना अधिक रिटर्न मिलने की संभावना होती है, उसमें भी अधिक इनमें जोखिम होता है। इसलिए निवेशकों को काफी सोच-समझकर ऐसे स्टॉक्स को चुनना चाहिए। एलियोस फाइनेंशियल सर्विसेज के शाम चांडक भी इस बात से सहमत हैं। उनका मानना है कि स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन सीजनल है, न कि बारहमासी। वह निवेशकों को इसके आधार पर सेक्टर्स और थीम चुनने की सलाह देते हैं। फिर मैक्रो-इकोनॉमिक और जियो-पोलिटकल जैसे दूसरे फैक्टर्स को ध्यान में रखने में बेहतर एंट्री प्वाइंट चुनने की सलाह देते हैं।

2. पहले दिन से जोश एकदम हाई रखना

कई बार बहुत ज्यादा जोश भी हानिकारक होता है। 2023 की शाानदार तेजी देखकर कई नए निवेशक इस साल बड़े रिटर्न के लालच से बाजार में आएंगे। हालांकि यहां एक बार सारी पूंजी लगाना जोखिम भरा हो सकता है। बाजार में कभी भी मुनाफावसूली या अन्य कारणों से गिरावट आ सकती है। स्मॉलकैप शेयरों में यह गिरावट और तेज होती है। ऐसे में अपनी पूरी पूंजी निवेश करने का जोखिम लेना एक बड़ी गलती है। इसकी जगह समय के साथ निवेश को धीरे-धीरे बढ़ाना सही रणनीति होगी।

3. PE को वैल्यूएशन के बराबर नहीं मानें

अधिकतर निवेशक किसी कंपनी के वैल्यूएशन को देखने के लिए पीई रेशियो को सबसे सटीक फॉर्मूला मानते हैं। हालांकि, स्मॉल-कैप के लिए मामला थोड़ा अलग हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस सेगमेंट कई सेक्टर्स, कैटेगरी और स्पेशल बिजनेसों के स्टॉक भी शामिल होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि स्टॉक से तुलना के लिए अधिक कंपनियों नहीं होती है। ऐसे में पीई पर निर्भर रहना कई बार धोखा दे सकता है। रैना ने कहा कि इसकी स्टॉक की लंबी अवधि की ग्रोथ की संभावनाओं को देखें। साथ ही स्टॉक के मार्जिन प्रजर्शन और रिटर्न ऑफ कैपिटल एंप्लॉयड जैसे मापदंडों पर जरूर विचार करें।

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4. रिसर्च करने में आलसपना दिखाना

स्मॉल कैप में निवेश के लिए व्यापक शोध और मेहनत की जरूरत पड़ती है। इस सेगमेंट कंपनियां कई बार बहुत छोटे और अलग सेगमेंट में कारोबार करती है। ऐसे में कंपनी की वित्तीय स्थिति, उसके लक्ष्य और ग्रोथ की संभवानाओं को समझने के लिए काफी परिश्रम करना पड़ता है। अधिकतर बड़े ब्रोकरेज फर्म इन स्टॉक को कवर नहीं करते हैं। इसलिए निवेशकों को खुद ही सारी जानकारी जुटानी पड़ती है। शाम चांडाक ने कहा कि निवेश करने से पहले की कंपनियों की कम से 2 साल की एनुअल रिपोर्ट को जरूर पढ़े। उसके बिजनेस मॉडल, रेवेन्यू के स्रोत, रेवेन्यू पर असर डालने वाले कारकों, इसके कॉम्पिटीशन और मैनेजमेंट की टिप्पणियों को लेकर समझ विकसित करें।

5. बड़े निवेशकों को नजरअंदाज करना

हमेशा उन शेयरों पर नजर रखें, जिन्हें बडे़ इंस्टीट्यूशनल निवेशक खरीद रहे हैं। शाम चांडाक का कहना है कि बड़े निवेशकों के पास कंपनी की अधिक वित्तीय जानकारी होती है और वे सीधे मैनेजमेंट से भी संपर्क कर सकते हैं। ऐसे में वह रिटेल निवेशकों के मुकाबले ज्यादा अच्छे तरीके से कंपनी को समझते हैं। गर किसी स्मॉल-कैप कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में कोई संस्थागत निवेशक नहीं है, तो इसके पीछे जरूर कोई कारण हो सकता है और निवेशकों को ऐसे शेयरों को लेकर सतर्क रहना चाहिए

6. सभी शेयरों को एक तराजू में नहीं तौले

लार्जकैप के मुकाबले स्मॉलकैप कंपनियों का कारोबार ज्यादा अधिक सेगमेंट में फैसला हुआ है। इसका मतलब है कि किसी एक कंपनी के वैल्यूएशन का आधार, जरूरी नहीं है कि दूसरे पर भी फिट हो। रैना उन शेयरों से बचने का भी सुझाव देते हैं, जो बहुत ही जटिल या नीश सेगमेंट में कारोबार कर रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसे मामलों में बिजनेस मॉडल को समझना आम निवेशकों के लिए मुश्किल हो जाता है।

7. कम-फ्री फ्लोट वाले शेयरों से दूर रहे

फ्री-फ्लोट मतलब किसी कंपनी के कितने शेयर खरीदने और बेचने के लिए उपलब्ध हैं। अगर किसी शेयर का फ्री फ्लोट कम है, तो यह एक जाल हो सकता है, जिसमें फंसने की बजाय आपको दूर रहना चाहिए। अनुभवी फंड मैनेजर, पंकज टिबरेवाल बताते हैं कि जब फ्री फ्लोट कम होता है, तो शेयर बहुत कम निवेशकों के हाथ में होते हैं। बड़े निवेशकों के लिए ऐसे शेयरों की कीमत को ऊपर ले जाना आसान होता है और शेयर ऊपर जाता देखकर कई बार छोटे निवेशक इन्हें खरीदकर फंस जाते हैं। इसके अलावा कम फ्री-फ्लोट के चलते स्टॉक से बाहर निकलने की संभावना सीमित हो जाती है।

डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

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