Pump and Dump का अनोखा मामला, ‘फर्जी’ जमीन पर करोड़ों के शेयरों की खरीद-बिक्री

Pump and Dump का अनोखा मामला, ‘फर्जी’ जमीन पर करोड़ों के शेयरों की खरीद-बिक्री

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Pump and Dump: शेयर मार्केट में संभलकर चलना होता है। इसमें वोलैटिलिटी तो है ही, साथ ही फर्जीवाड़े की भी कमी नहीं है। ऐसा ही एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें कंपनी के प्रमोटर्स ने एक ऐसी जमीन के जरिए पूरा खेल रचा, जो उनके पास थी ही नहीं। बाजार नियामक सेबी की जांच में यह खेल खुला। मोटी-मोटा समझें तो यह मामला है विकास प्रोपपंत एंड ग्रेनाइट (Vikas Proppant and Granite) की, जिसके प्रमोटर्स और एसोसिएट्स ने उस जमीन के लीज राइट्स पर प्रिफरेंस शेयर खरीदे, जिस पर उनका हक ही नहीं था। इसके बाद उन्होंने कंपनी के बारे में अच्छी लेकिन फर्जी खबरें फैला दी जिससे शेयर 1.02 रुपये से करीब 1650 फीसदी उछलकर 17.85 रुपये पर पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने अपने शेयर बेच दिए जिससे शेयर धड़ाम हो गए और बाकी निवेशक ठगे रह गए।

Pump and Dump से कमाए ₹24 करोड़

सेबी की जांच में सामने आया कि प्रमोटर्स बजरंग दास अग्रवाल (अब मृत), बजरंग दास अग्रवाल की पत्नी और कंपनी की एमडी बिमला देवी जिंदल, उनकी बेटी और कंपनी की एग्जेक्यूटिव डायरेक्टर कामिनी जिंदल और उनके सहयोगियों ने करीब 8 करोड़ शेयर बेचे। इससे उन्हें करीब 24 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ। बजरंग दास अग्रवाल नेशनल यूनियनिस्ट जमींदार पार्टी के फाउंडर भी हैं। कामिनी जिंगल राजस्थान के गंगनगर क्षेत्र से इस पार्टी के टिकट पर विधायक रह चुकी हैं।

खेल कैसे खुला

सेबी ने 22 जून 2018 और 30 अगस्त 2019 के बीच कंपनी के शेयरों में उतार-चढ़ाव की जांच की क्या इसमें कोई इनसाइडर ट्रेडिंग हुई है या किसी नियम का उल्लंघन हुआ है? सेबी ने पाया कि कंपनी ने चार लोगों-प्रमोटर्स कामिनी जिंदल और बिमला देवी जिंदल और नॉन-प्रमोटर्स कांता देवी और उनकी बेटी कोमल को 32.5 करोड़ फुल्ली पेड इक्विटी शेयर प्रिफरेंशियल बेसिस पर जारी किए। इन शेयरों को लेकर रिकॉर्ड में डाला गया कि इन्हें जमीन पर लीज राइट्स के बदले में जारी किया गया है। यह जमीन राजस्थान के जोधपुर की तहसील बिलारा के गांव कपरड़ा में थी और लीज डीड के मुताबिक इसकी वैल्यू 81.25 करोड़ रुपये थी। अब सेबी ने जांच में पाया कि यह जमीन उनके नाम पर थी ही नहीं बल्कि मेसर्स मानसरोवर इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन (MIDC) के नाम पर थी।

बिमला देवी जिंदल का कहना है कि उन्हें ऐसी किसी जमीन की जानकारी नहीं है और उन्होंने बीडी अग्रवाल ने जो डॉक्यूमेंट्स दिए, उन्होंने बिना पढ़े ही साइन कर दिए तो कामिनी जिंदल का भी कहना है कि उनके पिता ने जो डॉक्यूमेंट्स दिए, उन्होंने उस पर साइन कर दिए। उनका कहना है कि ऐसे में वे उस जमीन से संबंधित हो भी सकते हैं और नहीं भी। कांता का कहना है कि उन्हें अपने नाम पर ऐसी किसी जमीन के बारे में पता नहीं है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने देवर श्रीराम के अनुरोध पर डॉक्यूमेंट्स पर साइन किए थे। कांता ने श्रीराम के बारे में सुना था कि उन्हें बीडी अग्रवाल से “कुछ ग्रेनाइट भूमि” मिली थी। कोमल ने भी ऐसी किसी भी जमीन के बारे में जानकारी होने से इनकार किया और कहा कि उसके चाचा श्रीराम ने कई बार उससे हस्ताक्षर लिए थे। दोनों ने कहा कि उन्हें श्रीराम के आदेश पर कंपनी के शेयर मिले थे, लेकिन दोनों ने जमीन के स्वामित्व या जमीन पर पट्टे को लेकर कोई डॉक्यूमेंट नहीं जमा किया था।

अब इन सभी लोगों को जिन्हें प्रिफरेंशियल बेसिस पर शेयर मिले थे, वे जमीन पर मालिकाना हक या लीज राइट्स को लेकर डॉक्यूमेंट्स नहीं पेश कर पाए और सब-रजिस्ट्रार के लैंड रिकॉर्ड्स में भी इनका जमीन पर कोई दावा नहीं मिला। इस प्रकार यह तय हो गया कि ये शेयर फर्जी तरीके से और बिना सोचे-विचारे जारी किए थे।

SEBI ने क्या सुनाया फैसला

15 जनवरी के अपने आदेश में सेबी ने सख्त रुख अपनाया है और कहा कि इसमें नरमी नहीं बरती जा सकती है। कई संस्थाओं ने स्वर्गीय बजरंग दास अग्रवाल को इस पूरी धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया था लेकिन सेबी का कहना है कि कंपनी की एमडी बिमला देवी जिंदल और एग्जेक्यूटिव डायरेक्टर कामिनी जिंदल की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है। चूंकि वे उनके कानूनी प्रतिनिधि भी हैं, इसलिए उनसे 26 अगस्त, 2019 से पेमेंट की तारीख तक 12 फीसदी सालाना की दर से ब्याज के साथ 21.51 करोड़ रुपये की गलत कमाई को चुकाने के लिए कहा गया है।

एकता मित्तल को 27 फरवरी, 2019 से पेमेंट होने तक 12 फीसदी सालाना के साधारण ब्याज के साथ गलत तरीके से कमाए गए 1.28 करोड़ रुपये के मुनाफे को चुकाने के लिए कहा गया है। कंपनी के दो एसोसिएट्स पुनीत और गौरव और कांता और कोमल को जो शेयर मिले, उससे उन्हें 5 फीसदी से अधिक वोटिंग राइट्स मिले और इस प्रकार उसी साल उनकी हिस्सेदारी 25 फीसदी से अधिक हो जाती। इसके बाद उन्हें कंपनी के शेयरों के लिए ओपन ऑफर लाना था लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए। अब सेबी ने ओपन ऑफर लाने को कहा है और कंपनी के शेयर लेने को कहा है। उन्हें 28 दिसंबर 2018 से पेमेंट होने तक 10 फीसदी की सलाना दर से ब्याज चुकाने को कहा गया है। अनुपालन अधिकारी को छोड़कर सभी नोटिस प्राप्तकर्ताओं को तीन साल के लिए बाजार में एंट्री से रोक दिया गया है।

कंपनी के किन खुलासे पर चढ़े थे शेयर

सेबी ने जिस पीरियड की जांच की है, उस दौरान कंपनी के कई ऐलान किए थे। इन ऐलानों के चलते 22 जून 2018 को शेयर 1.02 रुपये से उछलकर 6 मई 2019 को 17.85 रुपये पर पहुंच गए। कंपनी ने दावा किया था कि राजस्थान सरकार ने इसे माइनिंग लाइसेंस जारी किए हैं और इसे 29.08 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। कंपनी को ग्रेनाइट की माइनिंग और प्रोपेंट बनाने के लिए एलओआई लाइसेंस मिला है। इसे रुस की तेल और ड्रिलिंग कंपनी से 6.23 करोड़ डॉलर के 75500 टन के प्रोपेंट के लिए निर्यात ऑर्डर मिले हैं। इसके अलावा कंपनी ने ऐलान किया था कि प्रोपेंट प्रोजेक्ट की फाइनेंसिंग के लिए यह 1.5 करोड़ डॉलर जुटाने के लिए फ्रैंकफर्ट में निवेशकों से मिली। एक दावा यह भी किया गया है कि इसके डायरेक्टर्स के पास जोधपुर के पास 160 एकड़ जमीन है जिसमें 10 हजार करोड़ रुपये की ग्रेफाइट माइन की जा सकती है। हालांकि इन सभी दावों का कंपनी सेबी के पास कोई पेपरवर्क पेश नहीं कर पाई।

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