HDFC Bank का शेयर क्रैश, निवेशकों को गांठ बांध लेने चाहिए ये 4 सबक, नहीं होगा घाटा

HDFC Bank का शेयर क्रैश, निवेशकों को गांठ बांध लेने चाहिए ये 4 सबक, नहीं होगा घाटा

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HDFC Bank Shares: एचडीएफसी बैंक के शेयर क्रैश हो गए हैं। लगातार दूसरे दिन आज उसके शेयर में गिरावट आई। इस दौरान बैंक का मार्केट कैप अब तक 1.44 लाख करोड़ रुपये घट चुका है। पिछले 3 सालों में पहली बार HDFC बैंक के शेयरों ने इतना बड़ा गोता लगाया। बुधवार को तो एक दिन में इसका शेयर साढ़े 8.5 पर्सेंट गिर गया, जिससे इसका मार्केट कैप 1.1 लाख करोड़ रुपये कम हो गया। आज भी HDFC बैंक का शेयर 3 फीसदी गिरा है। इसके चलते पिछले 2 दिनों से शेयर बाजार में भी निवेशकों को काफी घाटा हुआ है। बैंक निफ्टी में करीब आधी गिरावट, इसी HDFC के स्टॉक के चलते आई है। इसकी चुनौतियां अभी भी खत्म होती नहीं दिख रही है, अमेरिका शेयर बाजार में सूचीबद्ध इसका एडीआर 7.5 और गिर गया है, जो स्टॉक में और गिरावट की आशंका जताता है। हालांकि इस पूरे मामले में निवेशकों के लिए कम से कम 4 चीजें सीखने वाली है

1. खराब नतीजे

एचडीएफसी बैंक के हालिया आंकड़ों पर बाजार का सरप्राइज होना बनता है। HDFC बैंक को कभी 30 फीसदी के टिकाऊ ग्रोथ के लिए जाना जाता है और यह मार्केट के पसंदीदा शयेरों में एक था। एक दशक पहले तक, यह दुनिया का सबसे महंगे बैंकों में से एक था, जो अपनी बुक वैल्यू के करीब 4.5 गुना पर कारोबार करता था। हालांकि आज इसकी गिनती मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया के 70वें सबसे बड़े बैंक के रूप में होती और यह अपने पीक वैल्यूएशन के करीब आधे भाव पर कारोबार कर रहा है।

ऐसा लगता है कि बैंक के सुनहरे दिन अब बीती बात हो चुकी है। पिछले 2 सालों में इका शेयर मात्र 1 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि इस दौरान सेंसेक्स ने 17 प्रतिशत की छलांग लगाई है। स्टॉक के खराब प्रदर्शन ने कई म्यूचुअल फंड स्कीमों के प्रदर्शन को भी खराब कर दिया है। हालांकि इस खराब प्रदर्शन के बावजूद HDFC Bank के शेयर को अधिकतर ब्रोकरेज फर्मों ने कवर करना जारी रखा। ताजा गिरावट की सबसे बड़ी वजह इसके दिसबंर तिमाही के नतीजे हैं और इन नतीजों ने ब्रोकरेज फर्मों की ओर से लगाए गए अनुमानों को कंपनी मैनेजमेंट की जिम्मेदारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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2. खराब एनालिसिस

अब यह कोई सीक्रेट नहीं है कि अधिक ब्रोकरेज फर्म अपनी रिसर्च और एनालिसिस के लिए कंपनी मैनेजमेंट की ओर से मुहैया कराई गई जानकारी और कमेंट्री पर निर्भर रहते हैं। अधिकतर के पास अपनी स्वतंत्र या गहराई वाली एनालिसिस नहीं होती है। HDFC बैंक से पहले पॉलीकैब के मामले में यही चीज देखी गई। पॉलीकैब में अनियमितता की खबर इनकम टैक्स छापे के बाद सामने आई, इससे पहले किसी ने अपनी रिपोर्ट में यह जिक्र नहीं किया था।

बाहर से देखने वालों को ऐसा लगता है कि एनालिस्ट या ब्रोकरेज फर्म किसी कंपनी पर काफी करीबी से नजर रख रहे हैं और उसके मुताबिक टारगेट प्राइस दे रहे हैं। लेकिन ऐसा होता नहीं है। यहां तक कि शायद कभी कोई एनालिस्ट्स या ब्रोकरेज किसी को सेल रेटिंग देते हैं। खासतौर से बड़ी कंपनियों के बारे में तो रेयर ही आपको ऐसा देखने को मिला। ऐसा लगता है कि एनालिस्ट्स बाजार में जारी राय से अलग पॉइंट्स रखने और Sell रेटिंग से बचने में झिझक रहे हैं।

इसकी एक वजह यह हो सकती है, कि अधिकतर ब्रोकरेज फर्म शायद इन कंपनियों से पंगा नहीं लेना चाहते हैं। आप HDFC बैंक ही देख लें, इसके खराब प्रदर्शन के बावजूद किसी भी एनालिस्ट्स ने इसे Sell रेटिंग नहीं दी है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्टॉक को 44 एनालिस्ट्स ने buy रेटिंग दी है, जबकि 6 ने होल्ड की रेटिंग दी है और Sell रेटिंग जीरो है। इसलिए स्टॉक में निवेश करते समय अपनी ओर से भी रिसर्च जरूर करें।

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3. खराब डिस्क्लोजर

HDFC बैंक के सामने कुछ चुनौतियां हैं। ब्रोकिंग फर्म बर्नस्टीन ने बताया कि बैंक का जितना तेजी से डिपॉजिट बढ़ा है, उतना तेजी से इसका एडवांसेज नहीं बढ़ा है और इसी के चलते इसका मार्जिन फ्लैट रहा है। बैंक ने दो फीसदी के रिटर्न ऑन एसेट्स को बरकरार रखने के लिए लोअर टैक्स एक्सपेंस रूट का इस्तेमाल किया है। इसके चलते करीब एक दशक में पहली बार बैंक का EPS घटा है। हालांकि मीडिया और एनालिस्ट्स के साथ बातचीत में बैंक इन चुनौतियों को पारदर्शी ढंग से बताने में विफल रहा और इसके चलते बाजार से ऐसा रिएक्शन देखने को मिला। HDFC बैंक का सालों से अपने वादे से ज्यादा उपलब्धि को डिलीवर करने के जाना जाता रहा है, लेकिन यह परंपरा भी टूटती दिख रही है, जिसने निवेशकों को थोड़ा निराश किया है।

4. खराब सेंटीमेंट

HDFC बैंक काफी विशाल बैंक या ऑर्गनाइजेशन है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में इसका भारी वेटेज हैं। ऐसे में अभी इसमें काफी निवेश आता रहेगा, लेकिन जरूरी नहीं है कि यह निवेश बाय चॉइस आ रहा हो। इंडेक्स में वेटेज के चलते पैसिव म्यूचुअ फंडों को एक बड़ा हिस्सा इसमें लगाना जरूरी हो जाता है। जबतक SIP आता रहेगा, तबतक म्यूचुअल फंड ये शेयर खरीदते रहेंगे। इस निवेश के चलते इसका शेयर रिकवर हो सकता है, लेकिन यह अपने प्रीमियम वैल्यूएशन पर कब जाएगा, इसे लेकर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।

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