Daily Voice: पीएसयू और इंफ्रा शेयरों की बढ़ेगी चमक, Paytm में सस्ते में खरीदने के लालच से बचें

Daily Voice: पीएसयू और इंफ्रा शेयरों की बढ़ेगी चमक, Paytm में सस्ते में खरीदने के लालच से बचें

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Daily Voice : वित्त वर्ष 2025 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और पीएयू शेयरों को लेकर बुलिश हैं। पहले भी हमारा फोकस इस शेयरों पर रहा है। आगे भी हमारा झुकाव इनकी तरफ बना रहेगा। इसके अलावा अब छोटे शेयरों की तरफ से हटकर हमारा रुझान लॉर्ज कैप शेयरों की तरफ हो गया है। ये बातें राइट रिसर्च, पीएमएस की संस्थापक और फंड मैनेजर सोनम श्रीवास्तव ने मनीकंट्रोल के साथ एक साक्षात्कार में कही हैं। इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि चुनावों के पहले पीएसयू और इंफ्रा शेयरों में चमक देखने को मिलेगी। उनका ये भी कहना है कि चुनाव के बाद भी नीतियों में निरंतरता जारी रहने से इन शेयरों में तेजी जारी रह सकती है।

क्वांटिटेटिव रिसर्च और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का 10 सालों से ज्यादा का अनुभव रखने वाली सोनम का मानना है कि अगर यूएस फेड के फंड दर में कटौती पर स्थिति साफ हो जाती है तो आईटी शेयरों की ओर निवेशकों के रुझान में जोरदार बढ़तोरी होती दिखेगी।

Paytm में सस्ते में खरीदने के लालच से बचें

Paytm से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए सोनम ने कहा कि आरबीआई की तरफ से जुर्माने की खबर आने के बाद से पेटीएम का स्टॉक 45 फीसदी टूट गया है। हालांकि स्टॉक को पिछले हफ्ते कुछ खरीदार मिले। स्टॉक में समग्र रूप से नकारात्मक रुझान बना रहा है। पेटीएम बैंक के मामले में नियमों के उल्लंघन के चलते इस स्टॉक को लेकर सेंटिमेंट खराब हुआ है।

कारोबार के मोर्चे पर देखें तो कंपनी पेमेंट बैंक लाइसेंस के बिना कामकाज कर सकती है। हालांकि तीसरे पक्ष के बैंकों पर निर्भर रहने से कारोबार के प्रदर्शन पर असर पड़ेगा और इस पर नियंत्रण कमजोर हो जाएगा। इस चुनौतियों के चलते कंपनी को मुनाफे में लौटने में लंबा वक्त लग सकता है। अब जब तक कंपनी से जुड़ी नकारात्मक भावनाएं खत्म नहीं हो जाती और ग्रोथ का रास्ता साफ नहीं हो जाता तब स्टॉक पर दबाव रहेगा। ऐसे में निवेशकों को इस स्टॉक को लेकर सावधान रहना चाहिए। जब तक स्थितियां पूरी तरह से साफ न हो जाएं तब तक सस्ते में खरीदने का लालच नहीं करना चाहिए।

50,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य हासिल करना मुश्किल

सरकार की विनिवेश नीति पर बात करते हुए सोनम ने कहा बजट में बुनियादी ढांचे के खर्च और फिस्कल कंसोलीडेशन पर सरकार के फोकस से साफ है कि सरकारी कंपनियों के वैल्यूएशन पर जोर दे रही है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी कंपनियों बेचने से पहले उनकी हालत पूरी तरह से चुस्त-दुरुस्त हो। सरकारी कंपनियों को अनुमानित मूल्य से कम मूल्य पर बेचने से सार्वजनिक आलोचना हो सकती है। सरकार को वित्तीय चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। सरकारी कर्ज को कम करने और सामाजिक कल्याण योजनाओं को निधि देने के लिए विनिवेश से पर्याप्त पैसा मिल सकता है। लेकिन कुछ सेक्टर राष्ट्रीय सुरक्षा या सामाजिक कल्याण के नजरिए से संवेदनशील हो सकते हैं। ऐसे में सही विकल्प मिलने तक सरकार इन पर नियंत्रण बनाए रखना पसंद कर सकती है।

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पिछले प्रदर्शन और वर्तमान बाधाओं को देखते हुए वित्त वर्ष 2025 (2024-25) के लिए भारत सरकार के 50,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करना चुनौतीपूर्ण लग रहा है। सरकार पिछले 5 सालों से विनिवेश लक्ष्य से लगातार चूक रही है। हालांकि इस साल कुछ सफल विनिवेश हुए हैं लेकिन बीपीसीएल, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया जैसी प्रमुख योजनाओं में देरी ने बड़ी चुनौतियां पैदा की हैं। बाज़ार की अस्थिरता, राजनीतिक मजबूरियां और कार्यान्वयन की जटिलता इस प्रक्रिया को और मुश्किल बना देती हैं। एक्सपर्ट्स की राय है कि वित्त वर्ष 2025 के लक्ष्य को प्राप्त करना असंभव है। अधिक यथार्थवादी आंकड़ा 40,000 करोड़ रुपये के आसपास होता।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

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