Budget 2024: क्या अंतरिम बजट के बाद फिर से चमकेंगे खपत वाले शेयर?

Budget 2024: क्या अंतरिम बजट के बाद फिर से चमकेंगे खपत वाले शेयर?

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Budget 2024: भारत आगामी चुनावों और अंतरिम बजट के लिए खुद को तैयार कर रहा है। ऐसे में विश्लेषक खपत वाले शेयरों (consumption stocks) में संभावित उछाल को लेकर सतर्क के साथ आशावादी रुख अपनाए हुए हैं। खपत वाले शेयरों को औमतौर पर डिफेंसिव शेयरों से कटेगरी में रखा जाता है। उम्मीद है आगामी चुनावों से पहले बाजार में बढ़ी वोलैटिलिटी के दौर में खपत वाले शेयर निवेशकों को स्थिरता प्रदान करेंगे। उम्मीद है कि सरकार उपभोक्ता मांग और खर्च और ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करने के उपायों पर फिर से फोकस करेगी। इससे खपत वाले शेयरों को फायदा होगा। गौरतलब है देश में ग्रामीण मांग में कमजोरी बनी हुई है। ग्रामीण बाजार शहरी बाजारों की तुलना में पिछड़ रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करने के उपायों पर फिर से फोकस करेगी।

वर्तमान में, भारत के उपभोग स्तर पर दबाव देखने को मिल रहा है। इसे बढ़ावा देने की जरूरत है। ब्रोकिंग फर्म एंजेल वन के रिसर्च के सीनियर वीपी, अमर देव सिंह का कहना है कि 1.4 अबर की आबादी में ज्यादातर मांग लगभग 10 करोड़ लोगों से आती है। उन्होंने कहा कि दोपहिया वाहनों की बिक्री बड़े पैमाने पर खपत का एक बड़ा इंडीकेटर है। यह बिक्री महामारी से पहले के हाई से नीचे बनी हुई है ये खपत स्तर में कमजोरी का संकेत है।

ब्रोकरेज कंपनी रुपीज़ी के निदेशक और वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक शीर्शम गुप्ता ने कहा कि आईटी जैसे शहरी सेक्टर में निकट अवधि की कमजोरियों और स्टार्टअप फंडिंग चुनौतियों के बावजूद कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी ( (गैर जरूरी या शौकिया खर्च वाले शेयर) शेयरों का लॉन्ग टर्म आउटलुक काफी अच्छा दिख रहा है।

बजट से बढ़ सकती है ग्रामीण मांग

इस बार का अंतरिम बजट लोकलुभावन होने की उम्मीद है। सरकार संभवतः बजट में नागरिकों के हाथों में डिस्पोजेबल आय को बढ़ावा देने का प्रयास करेगी, जिससे खर्च को बढ़ावा मिलेगा।

स्टॉकब्रोकिंग फर्म बोनान्ज़ा पोर्टफोलियो के ओमकार कामटेकर का कहना है कि ऐसा करने का एक तरीका प्रमुख फसलों के एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) को बढ़ाकर कृषि आय में बढ़त करना होगा। कामटेकर ने कहा कि इसके अलावा, करदाताओं को कुछ रियायतें या छूट दी जा सकती हैं।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च एनालिस्ट विंसेंट केए (Vincent KA) ने कहा बुनियादी ढांचे के विकास पर फोकस से खपत बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह ध्यान देने की बात है कि चुनावों के दौरान सरकार और राजनीतिक दल काफी पैसे खर्च करते हैं। इससे उपभोक्ता खर्च में बढ़त देखने को मिलती है।

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खपत वाले शेयरों का आउटलुक

विश्लेषकों का कहना है कि बढ़ती प्रति व्यक्ति आय, युवा आबादी और बढ़ते मध्यम वर्ग के कारण खपत वाले शेयरों का लॉन्ग टर्म आउटलुक काफी अच्छा नजर आ रहा है। ब्रोकिंग साइट स्टॉकबॉक्स के मनीष चौधरी का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में गिरावट, सभी प्रोडक्ट्स में प्रीमियमाइजेशन में बढ़त और उच्च विज्ञापन खर्च वॉल्यूम ग्रोत में तब्दील हो रहे हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि औसत आय के एक निश्चित स्तर तक पहुंचने के बाद लोग गैर-जरूरी वस्तुओं पर अधिक खर्च करते हैं। देश में लोगों की बढ़ती आय को देखते हुए लगता है कि आगे लोगों के खपत स्तर में तेज बढ़त होगी जिसका फायदा खपत वाले शेयरों को होगा।

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