सेबी ने संयुक्त रूप से किए गए निवेश के लिए नामांकन को वैकल्पिक बनाने का दिया सुझाव

सेबी ने संयुक्त रूप से किए गए निवेश के लिए नामांकन को वैकल्पिक बनाने का दिया सुझाव

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म्यूचुअल फंड निवेशकों और डीमैट खाताधारकों को अपना नामांकन पूरा करने के लिए बार-बार समय सीमा बढ़ाने के बाद भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अब एक नया सुझाव दिया है। 2 फरवरी को जारी एक कंसल्टेशन पेपर में सेबी ने सुझाव दिया है कि संयुक्त रूप से धारित म्यूचुअल फंड फोलियो और डीमैट खातों के लिए नामांकन को वैकल्पिक बनाया जाना चाहिए। ये अनिवार्य नहीं होना चाहिए। ध्यान रखने की बात है कि एकल धारक के नाम पर खुले खातों मामले में, निवेशक को अनिवार्य रूप से नॉमिनेशन करना होगा।

संयुक्त रूप से किए गए निवेश के मामले में खाताधारकों में से किसी एक की मृत्यु की स्थिति में, जीवित रहने वाले के नाम खाता ट्रांसफर होने का नियम लागू होगा। वर्तमान में ऐसा ही है। इस कंसल्टेशन पेपर में कहा गया है कि दो या दो से अधिक व्यक्तियों के एक डीमैट खाता खोलने है या संयुक्त रूप से म्यूचुअल फंड योजनाओं की इकाइयों को मालिकाना हक के मामलों में किसी एक की मृत्यु होने पर डीमैट खाते या म्यूचुअल फंड योजनाओं की इकाइयों का अधिकार और ब्याज जीवित संयुक्त धारकों/मालिकों को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। इस कंसल्टेशन पेपर सेबी को 8 मार्च, 2024 तक टिप्पणियां भेजी जा सकती हैं।

लगभग एक महीने पहले ही सेबी ने नामांकन पूरा करने की समय सीमा 31 दिसंबर, 2023 से बढ़ाकर 30 जून, 2024 कर दी थी। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि लंबित नामांकन वाले निवेशकों को उनके खातों को फ्रीज किए जाने का सामना न करना पड़े। कई निवेशकों को संयुक्त रूप से किए गए निवेश के मामले में नामांकन अपडेट करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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कंसल्टेशन पेपर में दिए गए आंकड़ों से पता चलता है कि संयुक्त रूप से धारित म्यूचुअल फंड फोलियो में से 27.2 प्रतिशत और संयुक्त रूप से धारित डीमैट खातों में से 6.2 प्रतिशत में नामांकन पूरा नहीं है।

जबकि अनिवार्य नामांकन को हटाने का सुझाव नामांकन पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत हो सकती है। हालांकि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स अभी भी एक व्यक्ति होने के महत्व पर जोर दे रहे हैं। यह विशेष रूप से उस समय काम आता है जब सभी संयुक्त धारकों का निधन हो जाता है। ऐसी स्थिति में एक नामांकित व्यक्ति होने से यह सुनिश्चित होता है कि वित्तीय संपत्ति मृतक के जीवित परिवार/कानूनी उत्तराधिकारियों को आसानी से मिल सके।

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