लोकसभा चुनावों से पहले मार्केट में तेजी का एक दौर आ सकता है : अजय बग्गा

लोकसभा चुनावों से पहले मार्केट में तेजी का एक दौर आ सकता है : अजय बग्गा

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लोकसभा चुनावों से पहले स्टॉक मार्केट में तेजी का एक दौर आ सकता है। यह कहना है मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा का। उन्होंने कहा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के अब इस साल की दूसरी छमाही में इंटरेस्ट रेट में कमी करने की उम्मीद है। इसके बावजूद इंडियन मार्केट में आने वाले हफ्तों में तेजी दिख सकती है। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने इंडियन स्टॉक मार्केट, इनवेस्टमेंट और पेटीएम पेमेंट्स बैंक सहित कई मसलों पर खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्राइवेट सेक्टर के बैंकों के सामने कई चुनौतियां हैं। एक तरफ उन पर प्रदर्शन में सुधार करने का दबाव है तो दूसरी तरफ लिक्विडिटी का मसला है।

लंबी अवधि में प्राइवेट बैंकों के स्टॉक्स निवेश के लिए आकर्षक

बग्गा ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद कई ऐसी वजहें हैं, जिनके चलते लंबी अवधि के लिहाज से प्राइवेट बैंकों में निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं। छोटी अवधि में मुश्किल के बावजूद लंबी अवधि में इकोनॉमी की ग्रोथ के लिए पूंजी उपलब्ध कराने में प्राइवेट बैंकों की बड़ी भूमिका होगी। उधर, सरकारी बैंकों की बैलेंसशीट में सुधार के बाद बैंकिंग सेक्टर में निवेश के विकल्प बढ़े हैं। सरकारी बैंकों का प्रदर्शन करीब एक दशक तक कमजोर रहने के बाद अब बेहतर हो रहा है। हाल में सरकार ने बताया है कि सरकारी बैंकों ने 98,000 करोड़ रुपये की कमाई की है। पिछले साल उनकी कमाई 70,000 करोड़ रुपये थी।

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फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों को नियमों का पालन करना होगा

पेटीएम पेमेंट्स बैंक के खिलाफ आरबाई की कार्रवाई के बारे में बग्गा ने कहा कि इससे फिनटेक इकोसिस्टम में रेगुलेटरी कंप्लायंस की अहमियत का पता चलता है। फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों को कंज्यूमर के हित में बनाए गए मानकों और नियमों का पालन करना जरूरी है। मार्केट स्टैबिलिटी के लिए यह आवश्यक है। आरबीआई ने पर्याप्त विचार किए बगैर इतने सख्त कदम नहीं उठाए होंगे। आरबीआई दुनिया के बेस्ट रेगुलेटर्स में से एक है। यह ध्यान में रखना होगा कि 11 पेमेंट्स बैंकों को लाइसेंस दिए गए थे। इनमें से 5 पेमेंट बैंकों के प्रमोटर्स ने खुद लाइसेंस सरेंडर कर दिए।

निवेश से पहले खुद अपनी जानकारियों के आधार पर लें फैसले

पेटीएम के स्टॉक्स के बारे में राय पूछने पर उन्होंने कहा कि मैं कंपनी के बारे में किसी तरह की टिप्पणी करना नहीं चाहूंगा। यह बहुत अच्छी कंपनी हो सकती है। इसे चलाने वाले लोग भी बहुत योग्य हो सकते हैं। लेकिन, जब कंपनी को लेकर इतनी बातें हो रही हैं तो यह कहना ठीक नहीं होगा कि यह मामला जल्द खत्म होने जा रहा है। इसलिए पहले सभी जानकारियों पर विचार करना जरूरी है उसके बाद फैसला लेना ठीक रहेगा। निवेशकों को यह नहीं देखना चाहिए कि विदेशी संस्थागत निवेशक और ब्रोकरेज फर्में क्या कर रही हैं। आपको खुद चीजों के बारे में जानकारी जुटानी होगी। उसके आधार पर फैसले लेने होंगे।

इंडियन इकोसिस्टम की शानदार ग्रोथ

उन्होंने कहा कि रिस्क के बावूजद इंडिया में स्टार्टअप इकोसिस्टम बढ़ रहा है। इसकी वजह यह है कि इंडिया में बहुत बड़ा कंज्यूमर मार्केट है। ऐसे में कंपनियों के लिए प्रॉफिट कमाने का बड़ा मौका है। ऐसे में इनवेस्टर्स वित्तीय फायदों के लिए संभावनाओं का फायदा उठाना चाहते हैं। ऐसे में प्राइवेट इक्विटी फर्मों की तरफ से रेगुलेटरी एक्शंस पर व्यक्त चिंता के बावजूद हमें उन वजहों को समझना होगा जिसके चलते वे निवेश में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

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