क्रेडिट सुइस एटी1 बॉन्ड में आई गिरावट से निवेशकों लगा तगड़ा झटका, एचडीएफसी बैंक के खिलाफ शिकायत हुई दर्ज

क्रेडिट सुइस एटी1 बॉन्ड में आई गिरावट से निवेशकों लगा तगड़ा झटका, एचडीएफसी बैंक के खिलाफ शिकायत हुई दर्ज

[ad_1]

एक निवेशक पंकज सिन्हा को भारत के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर के बैंक एचडीएफसी बैंक लिमिटेड में उनके बैंकर ने बेहतर रिटर्न पाने को लिए एक ऑफशोर खाता खोलने और अपनी बचत का 250,000 डॉलर विदेशी बांड में निवेश करने की सलाह दी। 48 पंकज सिन्हा ने अपने निवेश पर बेहतर रिटर्न पाने के लिए ज्यादा नोट खरीदने के लिए कर्ज भी लिया। लेकिन पिछले साल मार्च तक, बांड खरीदने के सिर्फ 18 महीने बाद, सिन्हा ने अपना अधिकांश निवेश गंवा दिया था। इनमें से अधिकांश नोट क्रेडिट सुइस के एडिशनल टियर 1 बांड थे, जिन्हें कॉन्टिंजेंट कन्वर्टिबल या CoCos के नाम से भी जाना जाता है। जब स्विट्जरलैंड के रेग्यूलेटर ने यूबीएस ग्रुप एजी द्वारा बैंक के बचाव के दौरान लगभग 17 बिलियन डॉलर के नोट राइट कर लिए तो ग्लोबल बांडधारकों का सफाया हो गया।

सिन्हा के लिए ये सदमा शायद खत्म नहीं हुआ है। क्योंकि एचडीएफसी बैंक ने कर्ज का कुछ हिस्सा चुकाने के लिए उनकी एक सावधि जमा पर ग्रहणाधिकार (lien)लगा दिया है।

पंकज सिन्हा मूल रूप से भारत से हैं, लेकिन अब श्रीलंका में रहते हैं। वहां वह एक ग्लोबल पेय कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं। पंकज ने कहा “हालांकि मैं कंपनियां चलाता हूं लेकिन मैं एक बहुत ही खराब व्यक्तिगत निवेशक हूं। मुझे अपने बच्चों की शिक्षा के लिए जमा अपनी सारी नकदी और बचत खोने का खतरा है।”

सिन्हा की स्थिति इस बात को उजागर करती है कि कैसे व्यक्तिगत निवेशक क्रेडिट सुइस के एटी1 बांड के ऐतिहासिक सफाए से वित्तीय घाटे का दर्द सह रहे हैं। यह उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी है जो जोखिमपूर्ण निवेश विकल्पों को पूरी तरह से समझे बिना उनमें निवेश कर रहे हैं। यह दुनिया भर में एक बड़ा मुद्दा है और भारत में भी प्रासंगिक है। देश में बढ़ती सम्पन्नता ने अधिक यील्ड वाले निवेश के लिए लोगों की भूख बढ़ा दी है। ऐसे में उन्होंने ऐसे जोखिमपूर्ण निवेश विकल्पों को लेकर सावधान रहने की जरूरत है।

बता दें कि ग्लोबल वित्तीय संकट के बाद बैंकों के बचाव का बोझ बॉन्डधारकों पर डालने और करदाताओं से दूर करने के लिए AT1 बॉन्ड विकसित किए गए थे। ये बॉन्ड डेट इंल्ट्रूमेंट्स में सबसे निचले पायदान पर हैं। ये अच्छे समय में बढ़िया रिटर्न देते हैं, लेकिन अगर बैंक मुसीबत में फंस जाए तो इनमें निवेश करने वालों नुकसान उठाना पड़ता है।

भारत में बैंकों को खुदरा निवेशकों को ये नोट बेचने से प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन “पेशेवर निवेशकों” को इनकी बिक्री की जा सकती है। इनमें ऐसे लोग आते हैं जो वित्तीय रूप से अच्छी तरह से जनकार है और जिसके पास निवेश करने के लिए 1 मिलियन डॉलर से अधिक की पूंजी है। हालांकि एचडीएफसी भारतीय निवासियों को क्रेडिट सुइस बांड नहीं बेच सका। लेकिन वह कानूनी तौर पर उन्हें अपने विदेशी ग्राहकों को बेच सकता था जो पेशेवर निवेशक मानदंडों को पूरा करते थे।

सिन्हा का कहना है कि एचडीएफसी और बैंक के उनके रिलेशनशिप मैनेजरों पर यह कहकर गलत तरीके से उन्हें बॉन्ड बेचे कि वे बॉन्ड सुरक्षित हैं। इसके अलावा उनको बॉन्ड से जुड़े जोखिमों के बारे में भी कुछ नहीं बताया गया। उनका आरोप है कि बैंक ने गिरते भाव के बारे में चिंता जाहिर करने के बावजूद उन्हें अपने पोजीशन से बाहर निकलने में मदद नहीं की और उन्हें वापस कर्ज लेने की सलाह दी गई थी। उनका यह भी दावा है कि उन्हें गलत तरीके से एक ऐसे पेशेवर निवेशक के रूप में वर्गीकृत किया गया था जिसकी कुल संपत्ति 4 मिलियन डॉलर से ज्यादा थी।

पंकज ने एचडीएफसी बैंक के खिलाफ की शिकायत

पंकज सिन्हा ने एचडीएफसी के खिलाफ भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज की है और मुआवजे में 30 लाख डॉलर की मांग की है। उनकी शिकायत पर पहली सुनवाई 16 जनवरी को होनी थी लेकिन इसे मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। आयोग के पास सिन्हा के आरोपों का जवाब देने के लिए एचडीएफसी को बुलाने की शक्ति है और अगर वह उचित समझे तो हर्जाना भी दिला सकता है।

एचडीएफसी बैंक की सफाई

एचडीएफसी ने इस बारे में ब्लूमबर्ग न्यूज के सवालों के जवाब में कहा कि जब उसने क्रेडिट सुइस सहित ऑफशोर शाखाओं के माध्यम से बांड के लिए लेनदेन निष्पादित किया तो इसमें सभी प्रक्रियाओं और कानूनों का अनुपालन किया गया। बैंक ने कहा कि बॉन्ड “रिवर्स सॉलिसिटेड” थे जिसका अर्थ है कि ग्राहक ने उनसे इनमें निवेश का अनुरोध किया था। ग्राहकों का वैल्यूएशन पेशेवर के रूप में किया गया था।

बैंक के एक प्रवक्ता ने एक लिखित बयान में कहा, “एचडीएफसी बैंक यह स्पष्ट करना चाहता है कि वह विशिष्ट ग्राहकों के अनुरोधों के मुताबिक तीसरे पक्ष के वित्तीय प्रोडक्टस को बेचते समय अत्यधिक सावधानी बरतता है और सभी स्थानीय नियमों को पूरा करता है।”

पंकज अकेले शिकार नहीं

एचडीएफसी के डिस्क्लोजर और एटी1 बांड की जांच प्रक्रिया के बारे में चिंता व्यक्त करने वाले सिन्हा अकेले नहीं हैं। यूएई स्थित एक अनिवासी भारतीय वरुण महाजन का आरोप है कि उन्हें और उनकी पत्नी को क्रेडिट सुइस कोकोस (CoCos)के जोखिमों के बारे में जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि उन्हें इसमें 279,775 डॉलर का नुकसान हुआ। बॉन्ड पर लाभ उठाने के लिए दंपति ने एचडीएफसी द्वारा दिए गए ऋण पर ब्याज का भुगतान करना जारी रखा है। उन्होंने आयोग या किसी अन्य एजेंसी के समक्ष दावा दायर नहीं किया है।

महाजन ने ब्लूमबर्ग को बताया, “बैंक ने मुझे यह नहीं बताया कि क्रेडिट सुइस बॉन्ड, एटी1 बॉन्ड थे और उनके साथ जोखिम जुड़े थे। उन्होंने इन एटी1 बांडों को गैर-एटी1 बांड के समान दस्तावेज़ में पेश किया। बैंक ने यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किया कि हम इसमें निवेश के पात्र थे या नहीं। हम पेशेवर निवेशक नहीं बल्कि खुदरा निवेशक हैं।”

इस पर एचडीएफसी ने कहा है कि सभी मामलों में ग्राहकों के अनुरोध पर लीवरेज (कर्ज) प्रदान किया गया, उचित खुलासे किए गए और सहमति प्राप्त की गई। एचडीएफसी के प्रवक्ता ने कहा, “बैंक की प्रक्रिया और ग्राहकों के साथ साझा किए गए सभी दस्तावेजों के मुताबिक प्राप्त कुछ शिकायतों का उचित रूप से समाधान किया गया है।”

Konstelec Engineers IPO Listing: लिस्टिंग पर तीन गुना बढ़ा पैसा, ISRO-NTPC के सप्लायर की धांसू लिस्टिंग

क्रेडिट सुइस के एटी1 नोट से दुनिया भर में हुआ नुकसान

क्रेडिट सुइस के एटी1 से होने वाले नुकसान लिए कई मुकदमे हुए हैं, जिनमें जापान भी शामिल है। जापान में निवेशक वित्तीय फर्मों के खिलाफ काफी सक्रीय हैं। उन्होंने कुछ बड़ी जापानी ब्रोकरेज कंपनियों पर यह आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है कि कंपनियों ने इन नोट्स के बारे में गलत जानकारी देते हुए उन्हें बेच दिया। जापानी निवेशकों के एक अन्य समूह ने मॉर्गन स्टेनली के साथ मिल कर बने मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप इंक के संयुक्त ब्रोकरेज उद्यम पर मुकदमा ठोंक दिया है। निक्केई एशिया ने 15 जनवरी जारी रिपोर्ट में बताया है कि मित्सुबिशी यूएफजे मॉर्गन स्टेनली सिक्योरिटीज ने आरोपों का खंडन किया है।

एक ही जगह सारा निवेश करने से बचें

दिल्ली स्थित अक उद्यमी रोहित आनंद की बचत उनके पूर्व बैंकरों के कहने पर किए गए निवेश में फंस गई थी। उन्होंने का “एक योग्य निवेशक होने का मतलब है कि आपको बारीक से बारीक विवरण पढ़ना होगा और ऐसी किसी चीज़ में निवेश नहीं करना होगा जिसे आप नहीं समझते हैं। मैं अब अपने सभी अंडे एक टोकरी में नहीं रखता।”

[ad_2]

Source link

CATEGORIES
Share This

COMMENTS

Disqus ( )